औली के संजीवनी शिखर पर गूंजी श्री राम की महिमा, अखंड रामायण और हवन के साथ हुआ महायज्ञ का समापन

ज्योतिर्मठ । विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल औली के पावन ‘संजीवनी शिखर’ पर हनुमान जयंती के पावन अवसर पर आयोजित दो दिवसीय अखंड रामायण पाठ का विधि-विधान, हवन-पूजन और विशाल भंडारे के साथ भव्य समापन हुआ। हनुमान जी के पदचिह्नों से पवित्र इस धरा पर आयोजित इस अनुष्ठान में स्थानीय निवासियों सहित सैकड़ों की संख्या में हनुमान भक्तों ने शिरकत की।

भक्ति और आस्था का संगम

संजीवनी शिखर स्थित हनुमान मंदिर में अखंड रामायण के पाठ से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। दो दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान के समापन अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती और भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष अमित सती ने विशेष रूप से कार्यक्रम में शिरकत कर पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती देवेश्वरी शाह, सभासद प्रवेश डिमरी, और भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णमणि थपलियाल सहित क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों ने भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

सकलानी परिवार की सराहनीय पहल

हनुमान जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम की जिम्मेदारी मुख्य रूप से सकलानी परिवार द्वारा निभाई जाती है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को नरोत्तम प्रसाद सकलानी, देवेंद्र बल्लभ सकलानी, अनिल सकलानी और मंदिर के पुजारी नागेंद्र सकलानी पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार के सदस्य शिव प्रसाद सकलानी और वैभव सकलानी.गौरव सकलानी, हरिबल्लभ सकलानी सहित पूरे कुनबे ने मिलजुलकर व्यवस्थाएं संभालीं। समापन के उपरांत आयोजित विशाल भंडारे में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

पौराणिक महत्व : हनुमान जी और संजीवनी का संबंध

मान्यता है कि त्रेता युग में जब मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हुए थे, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी की खोज में इसी मार्ग से द्रोणागिरी पर्वत की ओर निकले थे। कहा जाता है कि औली का यही वह स्थान है जहां से हनुमान जी को द्रोणागिरी पर्वत स्पष्ट दिखाई दिया था, इसीलिए इस शिखर को ‘संजीवनी शिखर’ के नाम से पूजा जाता है। यहाँ की गई पूजा का विशेष फल मिलता है, इसी अटूट आस्था के कारण हर साल यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है।

क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना

कार्यक्रम के समापन पर आयोजित हवन में आहुतियां डालकर विद्वान पुरोहितों ने क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की मंगल कामना की। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से न केवल सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होता है, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

बदरीनाथ धाम में नगर पंचायत की एडवांस टीम शुरू किया बर्फ हटाना

Fri Apr 3 , 2026
गोपेश्वर (चमोली)। चारधाम यात्रा तैयारियों को लेकर नगर पंचायत का 50 सदस्यीय दल बदरीनाथ धाम में डेरा डाल गया है। इसके तहत एडवांस टीम बदरीनाथ धाम में बर्फ हटाने में जुट गई है। आगामी 23 अप्रैल को खुलने जा रहे बदरीनाथ मंदिर के कपाट को लेकर यात्रा तैयारियां भी शुरू […]

You May Like

Share
error: Content is protected !!