देहरादून : उत्तराखण्ड सूचना आयोग, देहरादून ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत एक महत्वपूर्ण मामले में सख्त रुख अपनाते हुए हरिद्वार के लोक सूचना अधिकारी/उप जिलाधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह कार्रवाई पूर्व आदेशों की लगातार अवहेलना और सूचना उपलब्ध न कराने के चलते की है।
लोक सूचना अधिकारी / उप जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देशित किया जाता है कि वे आयोग के आदेश प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर बिन्द संख्या 02. 05 में धारित सूचना एवं बिन्द संख्या 08 की सूचना धारा 5(4)5 के तहत् संबंधित पटल से प्राप्त करने के उपरांत अपीलार्थी को कार्यालय में बुलाकर चर्चा करते हुए सत्यापित सूचना अपीलार्थी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। लोक सूचना अधिकारी द्वारा आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है तो अपीलार्थी सूचना का अधिकार अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 18 के अन्तर्गत आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने हेतु स्वतंत्र हैं।
आयोग द्वारा पत्रावली में संलग्न अभिलेखों का सम्यक अवलोकन / परीक्षण किया गया। उपस्थित अपीलार्थी के मौखिक कथनों का सुना गया जिससे स्पष्ट हुआ कि अपील संख्या 41467 में राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेश 27 मई 2025 के अनुपालन में लोक सूचना अधिकारी/उप जिलाधिकारी, हरिद्वार द्वारा शिकायतकर्ता को कोई सूचना प्रेषित नहीं की गयी। आज सुनवाई में लोक सूचना अधिकारी/उप जिलाधिकारी, हरिद्वार स्वयं, प्रतिनिधि अथवा हाइब्रिड मोड के माध्यम से उपस्थित नहीं हैं, न ही उनके द्वारा कोई लिखित अभिकथन आयोग को प्रेषित किया गया है, जो सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के उल्लंघन के साथ-साथ आयोग के आदेश की अवहेलना है।
आज सुनवाई में लोक सूचना अधिकारी/उप जिलाधिकारी, हरिद्वार स्वयं, प्रतिनिधि अथवा हाइब्रिड मोड के माध्यम से उपस्थित नहीं है, न ही उनके द्वारा आयोग को लिखित आख्या / स्पष्टीकरण प्रेषित किया गया है, जो उनकी हठधर्मिता का परिचायक है। आयोग द्वारा गत सुनवाई दिनांक 10.02.2026 के अनुपालन में शिकायतकर्ता को सूचना प्रेषित नहीं की गयी है, जो उनकी हठधर्मिता का परिचायक है। अतः वर्तमान लोक सूचना अधिकारी / उप जिलाधिकारी, हरिद्वार को निर्गत कारण बताओ नोटिस की पुष्टि किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। उक्तानुसार वर्तमान लोक सूचना अधिकारी/उप जिलाधिकारी, हरिद्वार पर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20 (1) के अन्तर्गत रू0 10,000/- की शास्ति अधिरोपित की जाती है। लोक सूचना अधिकारी / उप जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देशित किया जाता है कि सूचना का अधिकार नियमावली, 2013 के नियम 11 (क) व (ड़) के अनुसार आयोग के आदेश प्राप्ति के 03 माह कि अवधि समाप्त होने पर राजकोष में जमा करेंगे तथा उनके द्वारा उक्त राशि राजकोष में जमा न कराये जाने पर जिलाधिकारी हरिद्वार उक्त राशि वर्तमान लोक सूचना अधिकारी/उप जिलाधिकारी, हरिद्वार के वेतन / देयकों से कटौती कर तीन किश्तों में राजकोष में जमा करायेंगे तथा कृत कार्यवाही से आयोग को भी अवगत करायेंगे।
आज सुनवाई के दौरान उपस्थित अपीलार्थी द्वारा आयोग को अवगत कराया गया कि प्रकरण से संबंधित दुर्गा स्टोन केशर, दो बार सील किया गया। स्टोन केशर सील होने के बावजूद भी मालिक द्वारा खनन विभाग से मिलिभगत कर केसर की सील तोड़कर उसके अंदर की भी मशीनरी, वाहन आदि सभी विकी कर दिए गए हैं। अपीलार्थी द्वारा खनन विभाग एवं राजस्व विभाग पर अत्यंत गम्भीर आरोप लगाये गये। अतः आज के आदेश की प्रति जिलाधिकारी हरिद्वार को इस निर्देश के साथ प्रेषित की जा रही है कि उक्त प्रकरण एवं हरिद्वार जिले के अन्तर्गत उक्त स्टोन केशर के संबंध में विस्तृत जांच कराते हुए सभी संबंधित के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही करने पर विचार करना चाहें।
आयोग के आदेश की अवहेलना पर कार्रवाई
शिकायतकर्ता रजनीश सैनी द्वारा दायर शिकायत संख्या 16506 की सुनवाई राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुँवर के समक्ष 13 अप्रैल 2026 को हुई। आयोग ने पाया कि पूर्व में पारित आदेश दिनांक 27 मई 2025 के बावजूद संबंधित लोक सूचना अधिकारी द्वारा मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
लगातार अनुपस्थित रहे अधिकारी
सुनवाई के दौरान लोक सूचना अधिकारी/उप जिलाधिकारी हरिद्वार न तो स्वयं उपस्थित हुए और न ही किसी प्रतिनिधि को भेजा। आयोग को उनकी ओर से कोई लिखित स्पष्टीकरण भी प्राप्त नहीं हुआ, जिसे आयोग ने गंभीर लापरवाही और अधिनियम की अवहेलना माना।
कारण बताओ नोटिस के बावजूद नहीं दिया जवाब
पूर्व सुनवाई में आयोग द्वारा धारा 20(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बावजूद अधिकारी ने न तो जवाब दिया और न ही सुनवाई में भाग लिया। आयोग ने इसे “हठधर्मिता” करार देते हुए कड़ी टिप्पणी की।
10 हजार रुपये की शास्ति अधिरोपित
आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) के अंतर्गत संबंधित अधिकारी पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही निर्देश दिया कि यह राशि निर्धारित समयावधि में राजकोष में जमा की जाए, अन्यथा जिलाधिकारी द्वारा वेतन से कटौती कर वसूली की जाएगी।
खनन प्रकरण में गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने दुर्गा स्टोन क्रेशर से जुड़े मामले में गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि सील किए जाने के बावजूद क्रेशर की सील तोड़कर मशीनरी और वाहन बेच दिए गए। इस मामले में खनन एवं राजस्व विभाग की मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं।
जांच के निर्देश जारी
आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ई-चालान से जमा होगी जुर्माने की राशि
आयोग ने स्पष्ट किया कि अधिरोपित जुर्माना ई-चालान के माध्यम से जमा किया जाएगा। इसके लिए संबंधित अधिकारी को निर्धारित पोर्टल के जरिए भुगतान करना होगा।

